कि क्या तुम जानना चाहते हो, तुम्हारे बिना मैं कैसा हूँ?
तो सोचो हिमालय से शिव रूठ जाएँ तो क्या होगा,
सोचो गणेश जी से मोदक रूठ जाएँ तो क्या होगा,
सोचो तुम्हारे सपनों का आईना सपने में टूट जाए तो क्या होगा।
जैसे शब्द अधूरे हैं मात्रा के बिना,
जैसे कक्षा अधूरी है छात्रा के बिना,
जैसे दुर्गा अधूरी है आरती के बिना,
आज शिव खड़े हैं बिना पार्वती के